
मुझे कांग्रेस से निकाल दो लेकिन अर्चना कबूल नहीं…महेंद्र और सीताराम ने किया विरोध, तो कई लोग हैं ना खुश
दिलीप कुमार वैष्णव@आपकी आवाज
कोरबा छत्तीसगढ़ – प्रदेश सरकार के मुखिया भूपेश बघेल ने गुरुवार को निगम मंडलों के अध्यक्ष/ उपाध्यक्ष एवं सदस्य के रिक्त पदों पर बहुप्रतीक्षित नियुक्ति को अंतिम रूप दिया। पहली सूची जारी होने के साथ ही विरोध का स्वर भी सुनाई पड़ने लगा है। विरोध का पहला स्वर कोरबा जिले से फूटा है जहां राज्य महिला आयोग की सदस्य नियुक्त श्रीमती अर्चना उपाध्याय की खिलाफत शुरू हुई है।

वर्षों से कांग्रेस का दामन थामने वाली अर्चना उपाध्याय ने बीते वर्षों में कांग्रेस पार्टी से किनारा कर जोगी कांग्रेस का दामन थाम लिया था। वे कोरबा विधायक जयसिंह अग्रवाल की धर्मपत्नी श्रीमती रेणु अग्रवाल के महापौर का चुनाव लड़ने के दौरान खुला विरोध किया था। हालांकि बाद में उन्होंने अपनी गलती स्वीकार करते हुए पुनः कांग्रेस वापसी की। अब उन्हें महिला आयोग का सदस्य नियुक्त कर दिया गया है तो पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं नगर पालिक निगम में तीन बार के कांग्रेस पार्षद रहे महेंद्र सिंह चौहान और सीताराम चौहान ने इस पर अपना- अपना विरोध दर्ज करा दिया है। उन्होंने तो सोशल मीडिया में यह तक कह दिया कि भले उन्हें पार्टी से निकाल दिया जाए लेकिन उन्हें अर्चना मंजूर नहीं। वरिष्ठ महेन्द्र सिंग चौहान ने सोशल मीडिया में खुला विरोध कर दिया है।
साथ ही सीताराम चौहान पूर्व पार्षद मानिकपुर वार्ड क्रमांक 30 ने भी पुरजोर विरोध किया है। सीताराम ने श्रीमती अर्चना उपाध्याय के लिए जो कि कल निगम मंडल में महिला आयोग की सदस्य बनाई गई है वह पूर्व में भी कांग्रेस विरोधी थी और कांग्रेस को बुरा भला बोलती थी फिर उसको क्यों पद दिया गया यह इस पद में रहने का अधिकार नहीं रखती। साथ ही सीताराम ने कहा है कि और भी महिला है जो कांग्रेस की है रैली हर सभा में सेवा भाव से समर्पित है जिसे यह पद नहीं दिया गया है और जो कांग्रेस को बुरा भला बोलती है उसको शिखर पर चढ़ाया जा रहा है मैं इस पद के लिए पुरजोर विरोध करता हूं। अर्चना उपाध्याय को तुरंत हटाया जाए और कोरबा के किसी निष्ठावान कांग्रेसी कर्मठ को यह महिला आयोग का सदस्य पद दिया जाए। जिसे लेकर शहर की राजनीति गरमा गई है और इसकी गूंज अब राजधानी तक भी सुनाई पड़ने वाली है। देखना यह है कि इस विरोध के स्वर कितने तीखे और असरकारक होंगे..
